
धर्मशाला। तपोवन में विधानसभा गेट के बाहर विकलांग दंपति दो मासूम बच्चियों के साथ छह दिन तक भटकता रहा, लेकिन मुख्यमंत्री को इस दंपति के साथ मिलने का वक्त नहीं मिला। हद तो तब हो गई जब छह दिन बाद भी इस बेसहारा परिवार का सीएम से मिलने के लिए पास तक नहीं बना। अक्षम पति और पत्नी विस सत्र के दौरान रोजाना सुबह सीएम से मिलने आ जाते थे और शाम तक इंतजार करने के बाद मायूस लौट जाते थे। यह परिवार रोज सीएम से मिलने के लिए आवेदन पत्र गेट पर देता था, लेकिन रोज पास मिलने के बजाय तारीख पर तारीख ही मिलती। दो नन्ही बच्चियों के साथ विस गेट पर सीएम के इंतजार में बैठे शारीरिक रूप से अक्षम पुष्पा देवी और उसके पति सुखदेव ने बताया कि 16 दिसंबर से रोजाना विस गेट पर वे आवेदन पत्र दे देते थे, लेकिन छह दिन हो गए मुख्यमंत्री से मिलने के लिए उनका पास तक नहीं बनाया गया। पुष्पा देवी और सुखदेव ने बताया कि वे धर्मशाला तहसील के तहत आने वाले कनेड़ गांव (डा. घियाणा कलां) के रहने वाले हैं। दोनों शारीरिक रूप से अक्षम हैं। रोजगार का कोई साधन नहीं है। उन्होंने भाई के मकान के एक कमरे में शरण ले रखी है। बिना कमाई के परिवार का पोषण करना मुश्किल हो रहा है। पुष्पा देवी ने बताया कि उसे बतौर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता नौकरी मिली थी, लेकिन उस केंद्र में गड़बड़ी करके दूसरी महिला को रख लिया गया। इसके बाद उसने न्याय के लिए अपील की। दो बार उसके हक में फैसला आया, लेकिन उसे आंगनबाड़ी केंद्र में तैनाती नहीं दी जा रही है। 2007 से उसे सिर्फ तारीख पर तारीख मिल रही है। थक-हार कर वह मुख्यमंत्री से न्याय मांगने आई थी, लेकिन यहां भी उसे छह दिन तक गेट के बाहर भूखे प्यासे इंतजार ही करवाया गया।
सीएम और मंत्रियों से मिलने के लिए स्वीकृति सीएम और मंत्रियों की ओर से ही दी जाती है। शारीरिक रूप से अक्षम दंपति को मिलने के लिए समय क्यों नहीं मिला, इस पर कहना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है।
